गुरु पूर्णिमा विशेष,,,टीनशेड की तपस्या से बना विश्व रिकॉर्ड: गुरु योगेंद्र नामदेव की मेहनत ने दो नन्हीं शिष्याओं को दिलाई वैश्विक पहचान
Rajat Chipa (Bhopal) 29-07-2026 Regional
भोपाल/सागर(मध्यप्रदेश)|सफलता केवल प्रतिभा से नहीं,बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण से मिलती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं सागर के युवा संगीतकार योगेंद्र नामदेव(युग) पिता हरि प्रसाद जी नामदेव, माता उमा देवी नामदेव,जिनकी कठिन साधना ने महज तीन वर्ष की दो नन्हीं बच्चियों को दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला ड्रमर बनने का विश्व रिकॉर्ड दिला दिया।
एक समय ऐसा था जब भीषण नौतपे की गर्मी में योगेंद्र नामदेव टीनशेड के छोटे से कमरे में घंटों ड्रम का अभ्यास किया करते थे। तपती छत,पसीने से तरबतर शरीर और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संगीत के जुनून को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। यही संघर्ष आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया है।
योगेंद्र का बचपन साधारण परिवार में बीता।उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे,जिन्होंने सीमित आय के बावजूद परिवार और बच्चों के सपनों को प्राथमिकता दी।खर्च बचाने के लिए वे छोटी-छोटी जरूरतों में भी सादगी अपनाते थे। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में उनकी मां ने भी सिलाई-बुनाई का कार्य कर महत्वपूर्ण योगदान दिया।
योगेंद्र ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करियर शुरू किया,लेकिन उनका मन हमेशा संगीत में ही बसता था। कोविड काल के दौरान उन्होंने महसूस किया कि नौकरी और संगीत दोनों को साथ लेकर चलना संभव नहीं है तब उन्होंने सुरक्षित नौकरी छोड़कर पूरी तरह संगीत को अपना जीवन समर्पित करने का साहसिक निर्णय लिया।
आज उनकी मेहनत का परिणाम पूरी दुनिया देख रही है। उनकी तीन वर्षीय शिष्याओं ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर न केवल अपने गुरु का नाम रोशन किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सच्चा गुरु अपने शिष्यों की सफलता में ही अपनी सबसे बड़ी जीत देखता है।

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